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स्वास्थ्य जीवन बिताने के नियमसोने और उठने के नियम

🛌 सोने और उठने के नियम
* सोने का तरीका: लेटते समय पहले पाँव इकट्ठे करके घुटने से अंदर की तरफ मोड़ें, हाथों का सहारा लेते हुए किसी भी करवट लेटें, और फिर पाँव सीधे करें।
* उठने का तरीका: सीधा न उठें। पहले करवट लें, फिर सीधे पाँव मोड़ें, और हाथों का सहारा लेकर उठें।
* कारण: सीधा उठने से नाभि पर गलत असर पड़ता है और हृदय को रक्त की ज़रूरत बढ़ जाती है, जिससे बाद में अपचन, अस्थमा, डायाबिटीस, सरवाइकल स्पॉन्डीलोसिस, या हार्ट प्रोब्लेम हो सकती है।
* सोने का समय: रात को 10:30 बजे से पहले सो जाना चाहिए।
* कारण: पीनियल ग्रंथि ठीक रहने से ही शरीर के सारे काम-काज सुचारु रूप से चलते हैं। यह ग्रंथि भारत में रात को 12:30 और 1:00 बजे के बीच जागृत होती है, और यह तभी काम करेगी जब हम अच्छी गहरी नींद में हों। गहरी नींद की अवस्था में जाने के लिए कम से कम दो घंटे चाहिए।
* कमरे में अंधेरा: सोते समय कमरे में पूरा अंधेरा होना चाहिए ताकि पीनियल ग्लैंड ठीक से उकसाया जाए। नाइट लैंप या ज़ीरो वॉट बल्ब की आदत न लगाएँ।
* कारण: अंधेरे कमरे में सोने से आयु या उम्र लंबी होती है।
* तनाव मुक्त नींद: सोते समय सारे शरीर को ढीला रखें और दिमाग में कोई तनाव न हो, इसका ध्यान रखें। रात को हरि को याद करते हुए शांत मन से सोएँ।
* कारण: सुबह उठते समय दिमाग में तनाव हो तो सारा दिन सिर भारी रहेगा।
* उठते समय: हरि का नाम लेते हुए अच्छे सकारात्मक विचारों के साथ बिस्तर से उठें तो सारा दिन अच्छा जाएगा।
* ताज़ी हवा: सोते समय खिड़कियाँ खोलकर सोना चाहिए ताकि ताज़ी हवा कमरे में आए।
* कारण: बंद कमरे में सोने से कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे शरीर सारा दिन थका-थका सा रहेगा और काम करने को मन नहीं करेगा।
* करवटें बदलकर श्वास लेना (नींद न आने पर):
* पहले बाईं करवट में लेटकर चार श्वास लें।
* फिर सीधा लेटकर आठ श्वास लें।
* फिर दाईं करवट में लेटकर सोलह श्वास लें।
* लाभ: ऐसे करने से ब्लड प्रेशर की बीमारी आने की संभावना कम होगी। यह जिन्हें नींद नहीं आती उनके लिए भी एक उत्तम उपचार है।
* नोट: साधारणतः सोलह श्वास के पहले ही नींद आ जाएगी। अगर इसके बाद भी नींद न आए तो श्वास में ध्यान रखते हुए लंबे श्वास लेना शुरू कर दें (छोटे या जल्दी श्वास लेने से नींद नहीं आती)।
* हाथों की स्थिति: सोते समय सिर के नीचे या सिर के ऊपर हाथ रखकर या आँखों को बाजू से ढक कर सोना नहीं चाहिए।
* कारण: हाथों या बाजुओं को कंधे के स्तर (level) के ऊपर लंबे समय तक रखने से (जैसे सिर के नीचे रखकर सोते समय) रक्त नलिकाओं (subclavian arteries, axillary, और brachial arteries) पर clavicle हड्डियों का दबाव पड़ेगा, जिससे रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं होगा। इसका असर हृदय पर भी पड़ सकता है, जिससे सीने में दर्द आ सकता है, या हाथ/उँगलियाँ सुन्न हो सकती हैं। यह उन लोगों में ज्यादा होगा जिनमें विटामिन B_{12} की कमी है।
* सुबह उठते समय: उठते समय भी पूरा अंधेरा होना चाहिए, इसलिए सूर्य चढ़ने से पहले उठें।
* कारण: उठते समय कमरे में काफी रोशनी हो तो सारा दिन सिर भारी रहेगा।
* जमीन पर पाँव: चाहे सुबह, दोपहर या शाम हो, बिस्तर से उठते समय पाँव तुरंत नंगी जमीन पर न रखें। चप्पल पर रखें या कुछ देर ठहरने पर नंगे जमीन पर रख सकते हैं।
* कारण: बिस्तर के अंदर पैर गरम थे और जमीन ठंडी है, इसलिए तुरंत नंगी जमीन पर पाँव रखने से आपको सर्दी हो सकती है।
🚿 नहाने के नियम
* पानी का तापमान: जहाँ तक हो सके हर मौसम में ठंडे पानी से ही नहायें।
* लाभ: ठंडे पानी से नहाने की आदत डालने वालों को रक्त संचार अच्छी तरह से होने के कारण सर्दी होने के आसार कम होते हैं। अगर बचपन से ही यह आदत डाल दें तो बच्चों में सर्दी-खाँसी इत्यादि परेशानियां नहीं होंगी।
* पानी डालने का क्रम: सिर को धोते समय पानी का एक लोटा पहले सिर पे डालें, पर कानों पर नहीं आए यह ध्यान रहे। फिर गर्दन के नीचे पीठ और कंधों पर, फिर सारे शरीर पर डालना चाहिए। बच्चों को नहलाते समय भी इसी क्रम का ध्यान रखें।
* कारण: सिर पर पानी डालते समय अगर पहला लोटा का पानी कंधों या कान पर पड़ेगा, तो एक गहरा साँस आ जाने से पानी कानों में जा सकता है। यह पानी कान की मैल (wax) को पतला करके एक बुलबुला (bubble) बना देता है, जिसके प्रेशर से सुनना कम हो सकता है।
* घुटनों पर पानी: बैठ कर गरम पानी से नहाते समय सबसे पहले घुटनों पर पानी डालने के बजाय ऊपर कहे अनुसार सिर पे पानी डाल कर नहाना शुरू करें।
* कारण: गुरुजी कहते हैं कि बुढ़ापे में घुटनों का दर्द आने का यह भी एक कारण है।
* साबुन का उपयोग: साबुन से नहीं नहाना चाहिए क्योंकि उससे चमड़ी को नुकसान होता है।
* कारण: पसीना खुद गुणकारी है क्योंकि उसमें कई कीटाणुनाशक तत्व हैं जो कि साबुन लगाने के बाद खत्म हो जाते हैं।
* तेल लगाना: नहाने से पहले एक-एक बूँद सरसों तेल या कोई भी अन्य तेल को इन पाँच जगहों पर अवश्य लगाना चाहिए:
* कानों के पीछे
* नासिकाओं में
* नाभि
* गुदा
* Armpits यानि कच्छ के अंदर
* इन सब जगहों में तेल लगाने के बाद सारे शरीर पर लगाएँ और बाद में (बगैर साबुन लगाए) खाली सादे पानी से नहाना चाहिए।
🍽️ खाने-पीने के नियम
* नाश्ता और नहाना: सुबह ठंडे पानी से नहाने के बाद, कम से कम 45 मिनट तक नाश्ता नहीं करना चाहिए। नहाने के बाद ही नाश्ता करना चाहिए।
* कारण: नहाने के बाद शरीर को गरम होने में 30 से 45 मिनट तक समय लगता है। तब रक्त संचार चमड़ी की ओर ज्यादा रहता है, न कि पेट और पाचन संस्थान की तरफ। इस समय नाश्ता करने से वह कम पचेगा और गैस की समस्या रहेगी।
* नोट: अगर किसी कारण नाश्ता पहले करना पड़े तो काफी समय के बाद ही नहाना चाहिए ताकि खाया हुआ भोजन पच जाए। खाने के तुरंत बाद नहाने से अपचन या पेट की अन्य समस्याएँ हो सकती हैं।
* बैठकर खाना: जो कुछ भी खाएँ, हमेशा चौकड़ी या पलाठी लगा कर ही खाना चाहिए।
* कारण: इससे रक्त का बहाव पेट की तरफ अधिक होगा, क्योंकि खाने के बाद पाचन संस्थान के अंगों को ज्यादा रक्त की ज़रूरत होती है। कुर्सी पर बैठकर खाने से (पैर लटके रहने के कारण) रक्त का बहाव पैरों की ओर ज्यादा रहेगा, जिससे पाचन संस्थान के कार्यों के लिए पर्याप्त रक्त नहीं मिलेगा।
* खाने के बाद गतिविधि: भोजन के तुरंत बाद ही चलना या कोई अन्य भारी काम नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति को खाना खाने के 20 मिनट बाद तक चलना-फिरना नहीं चाहिए।
* लाभ: वज्रासन में बैठें तो बहुत अच्छा है। यह सावधानी मुख्यतः हृदय की बीमारी के रोगियों को तथा जिनको चलने पर साँस फूलती हो, उन्हें रखनी चाहिए।
* हाथ धोना: खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह से साफ कर लेने के बाद खाना चाहिए।
* चबाकर खाना: खाना खूब चबाकर खाना चाहिए।
* लाभ: इससे ज्यादा मात्रा में लार निकलेगी जो कि चपाती, चावल एवं अन्य मीठे पदार्थों को पचाने में मदद करती है। जबड़ों के हलचल से ब्रेन के नर्व्ज ठीक से काम करेंगे, जिससे पाचन संस्थान ठीक से काम करेगी और खाना ठीक से पचेगा।
* पानी कब पीएँ: खाने के बीच में या तुरंत बाद में पानी नहीं पीये। खाने के आधा घंटे पहले या आधा घंटे बाद में ही पीना बेहतर है।
* कारण: खाने के बीच में पानी पीने से लार तथा पेट में बनने वाले \text{HCI} एसिड की शक्ति कम हो जाएगी, तो पाचन बिगड़ जाएगी।
* अपवाद: भोजन के समय पानी का गिलास पास में रखना चाहिए, क्योंकि कभी भी कोई नवाला या ग्रास गले में अटकने पर या ठसका लगने पर काम आए। नवाला अटके या मुँह सूखा हो तो एक-आध घूँट पानी पी सकते हैं।
* पानी की मात्रा: भोजन करने के आधे घंटे बाद एक गिलास पानी पी सकते हैं और उसके बाद हर घंटे डेढ़ घंटे बाद एक गिलास पानी पीना चाहिए। साधारण व्यक्ति को रोज़ शुद्ध पानी के रूप में डेढ़ से दो लीटर पानी तो अवश्य पीना चाहिए।
* कारण: पानी कम पीने के कारण बहुत-सी बीमारियाँ आती हैं जैसे कब्जी, रुमेटिज्म, लो बी पी, एसिडिटी इत्यादि, जिन्हें एसिड की बीमारियाँ कहते हैं।
* नोट: चाय, ठंडे पेय इत्यादि पानी की जगह नहीं ले सकते, क्योंकि शरीर उन्हें भोजन ही समझता है।
* खट्टी चीजें (दर्द होने पर): \text{LMNT} में कहते हैं कि जोड़ों में दर्द अक्सर रक्त में एसिड बढ़ने के कारण आता है। सो ऐसे लोगों को खट्टी चीजें नहीं खानी चाहिए।
* उदाहरण: दही, इमली, टमाटर, नींबू इत्यादि।
* जो फल कच्चे होने पर खट्टे होते हैं और पकने पर मीठे होते हैं, जैसे संतरा, मौसमी, सेब, आम इत्यादि, उन्हें भी नहीं खाना चाहिए।
* जो फल कच्चे होने पर कड़वे या फीके होते हैं पर पकने पर मीठे होते हैं, जैसे केला, चीकू, पपीता, सीताफल, पेरू, अंजीर, आँवला इत्यादि, उन्हें शौक से खा सकते हैं।
* ऋतु के फल/सब्जियाँ: ऋतु के फल (seasonal fruits) और सब्ज़ियाँ ही खानी चाहिए जो उस प्रदेश या प्रांत में उगते हों।
* कारण: समय और जगह के अनुसार हमारे लिवर की केमिकल्स बदलती रहती हैं और वे उस ऋतु एवं स्थल के चीजों को पचाने के लिए बनती हैं, सो अन्य ऋतु या स्थल की चीजों को पचाने में गड़बड़ी होगी।
* खरबूजा/तरबूज के बाद पानी: खरबूजा या तरबूज खाने के बाद पानी न पीये।
* कारण: इनके ऊपर पानी पीने से शरीर में ऐल्कली बढ़ जाएगी जिससे पेट में दर्द हो सकता है, बुखार आ सकता है, या दस्त (loose motions) भी आ सकते हैं। जिन्हें फिट्स आती हैं, उन्हें ऐसे फल खाने से फिट्स बढ़ती हैं।
* पानी बैठकर पीएँ: पानी बैठ कर ही पीना चाहिए।
* कारण: खड़े होकर पीने से पिंडलियों में दर्द आता है। जब हम कुछ खाते या पीते हैं, रक्त का बहाव पेट की तरफ ज्यादा होगा तो उस समय पैरों को कम रक्त पहुँचेगा। सो माँस-पेशियों में कमजोरी आने के कारण वे दर्द करने लगती हैं।
* फ्रिज का पानी: सादा पानी या मटके का पानी ही पीना चाहिए। फ्रिज का पानी शरीर के लिए हानिकारक है।
* कारण: उस ठंडे पानी को गरम करके शरीर के तापमान तक लाने के लिए रक्त को ज्यादा काम करना पड़ता है, जिसके लिए ऊर्जा शक्ति खर्च करना पड़ता है जो शरीर के लिए फालतू काम है।
* सोकर उठने पर पानी: सोकर उठने पर तुरंत ठंडा पानी पीने से कुछ लोगों को कफ आना या नाक बहना इत्यादि हो सकते हैं। गुनगुना पानी पी सकते हैं, या उठने के बाद 5 मिनट ठहर कर सादा पानी या मटके का पानी पी सकते हैं।
* दूध/चाय के बाद पानी: दूध या चाय पीने के तुरंत बाद पानी पीने से ऐल्कली बढ़ेगी जिससे दस्त या पतली टट्टी आ सकती है और मसूड़े कमजोर हो सकते हैं।
* दस्त होने पर: पतली टट्टी या दस्त आने पर सादा पानी नहीं पीना चाहिए। कमजोरी न हो, इसलिए पानी में नींबू निचोड़कर उसमें ज्यादा मात्रा में नमक और शक्कर मिलाकर उसे घूँट-घूँट पीना चाहिए। खाली नमकीन पानी पीने से भी दस्त बढ़ सकती है।
* बुलबुले वाला पानी: जिस पानी में बुलबुले या bubbles हों उसे नहीं पीना चाहिए।
* कारण: कुछ देर रखने के बाद बुलबुले आने का मतलब उस पानी में बैक्टीरिया हैं जिनकी श्वसन प्रक्रिया के कारण कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकल रहा है। यह कोलेरा, टाइफाइड इत्यादि बीमारियाँ भी पैदा कर सकता है।
💡 कुछ अन्य सुझाव
* आँखों का व्यायाम: रोज नहाते समय आँखों के बाजू में दो छोटी छिद्रों (lacrymal ducts) को 30 बार धीमे-धीमे सहलाने से आँसू का संचार एवं आँखों के \text{lens} के अंदर का प्रेशर ठीक प्रकार से होगा एवं ग्लाउकोमा (glaucoma) या मोतिया से बचाया जा सकता है।
* वीरासन: वीरासन में ध्यान लगाने से एकाग्रता शक्ति (concentration power) बढ़ जाती है, जिससे याद्दाश्त (memory) बढ़ जाती है। यह बच्चों को पढ़ाई में बहुत लाभ देता है।
* दरवाजे की घंटी: घरों में कम आवाज़ वाला बजर ही लगाना चाहिए, न कि म्यूजिकल बैल्ल।
* कारण: संगीत बजानेवाली घंटियों की आवाज़ तीव्र होती है, जिससे सोये पड़े तपाक से उठने पर कुछ लोगों के कान में घंटियाँ बजने लगती हैं या चक्कर (vertigo) आ सकते हैं।
* कानों की सफाई: कानों से मैल (wax) नहीं निकालना चाहिए।
* कारण: शरीर इसे बनाता जाएगा।
* कान में तेल: कानों में तेल का बूँद टपकाना नहीं चाहिए क्योंकि उससे कान के पर्दे (ear drum) को नुकसान या हानि हो सकती है। परन्तु आप तेल को रूई (cotton) से हल्के से लगा सकते हैं।
* दवाइयाँ और कान: ऐन्टीबायोटिक्स की दवाइयाँ या चाय, कॉफी, सिगारेट इत्यादि में मौजूद कैफीन या निकोटिन से कान की नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे सुनना बन्द हो सकता है।
* चक्कर (Vertigo) से बचाव: उठते समय हरि का ध्यान करते हुए पलंग पर कम से कम 30 सेकेंड बैठ कर उठना बेहतर है।
* कारण: कान के अंदर semi circular canals में तरल फ्लूइड (fluid) भरा रहता है जो शरीर का संतुलन (equilibrium/balance) बनाये रखता है। तपाक से उठने पर इस फ्लूइड के बाहर निकलने से बहुत चक्कर आ सकते हैं, जिसे वर्टिगो कहते हैं।
* ब्लड प्रेशर के लिए कान दबाना: रोज नहाने के बाद कानों के छिद्र को चारों दिशाओं में अन्दर से बाहर की तरफ तीन-तीन बार दबाने से हाई ब्लड प्रेशर कम हो जाता है।
* नाक साफ करना (सर्दी में): सर्दी होने पर नाक को बहुत जोर से या ज्यादा साफ नहीं करना चाहिए। साफ करना हो तो दोनों नासिकाओं को खुला रखकर ही साफ करना चाहिए।
* कारण: एक को बंद रखकर जोर से हवा निकालने की कोशिश करने पर म्यूकस (कचड़ा) कान की नाड़ी के अंदर घुस जाएगा जिससे सुनना बंद हो जाएगा या कम सुनने लगेगा।
* नाक से पानी बहना: अगर नाक से पानी बह रहा हो, तो दस मिनट तक बायीं करवट में लेटने से सूर्य नाड़ी चलने लगेगी और नाक से पानी का निकलना बंद हो जाएगा।
* क्रैम्प्स (ऐंठन): क्रैम्प्स आने पर दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जा कर चुटकी बजाने से क्रैम्प्स निकल जाते हैं।
* हेयर डाई (Hair Dye): बालों के रंग बदलने का साधन (चाहे मेहंदी से बना हो या अन्य) उपयोग न करें।
* कारण: इसका केमिकल रक्त में प्रवेश करता है और कम से कम चालीस दिन तक पेशाब में आता रहता है। इसका मतलब है कि किडनीज को सामान्य कार्य के अलावा इस डाई को निकालने का extra (फालतू) काम करना पड़ता है। बार-बार उपयोग से किडनीज कमजोर हो सकती हैं, जिससे कैंसर या अन्य बड़ी बीमारियाँ आ सकती हैं।

Sanjay Yadav
Sanjay Yadav
Author
Mr. Sanjay Yadav is the Founder and Director of Ys Neurotherapy Health and Research Foundation and a qualified Neurotherapist from Mumbai, India, with extensive experience in the field...