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Neurotherapy Books

न्यूरो थेरेपी हिंदी पुस्तक

“Section – Two” of a Hindi book on Neurotherapy.
This section is titled: NEUROTHERAPY.
The book appears to be from the YS Neurotherapy Health and Research Foundation.
The subtitle for the section is वैज्ञानिक आधार एवं तकनीकी पक्षन्यूरोथेरेपी के बारे में विशेष जानकारी यहाँ दी गई है:
📜 NT चिकित्सा के प्रति विशेष जानकारी (Special Information Regarding LMNT Therapy)
न्यूरोथेरेपी, जिसे संक्षेप में NT कहा जाता है, एक अनुपम और अतुलनीय चिकित्सा पद्धति है।
* यह एक दवा रहित (drugless) राम बाण विज्ञान है जो प्रायः सभी बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखता है।
* कार्य प्रणाली:NT कई प्रकार के तरीकों से आंतरिक अंगों एवं ग्रंथियों में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है।
* इसका एक मुख्य तरीका यह है कि पैरों के तलवों या हथेलियों से शरीर के खास जगहों पर निर्धारित समय, कोण एवं क्रम में दबाव डालना।
* इससे आंतरिक अंगों की कार्य शैली सुधर जाती है और वे सुचारु रूप से कार्य करने लगते हैं।
* इस प्रकार, यह रोग की जड़ या मूल कारण को ही समाप्त कर देता है।
* अन्य पद्धतियों से संबंध: पहली नज़र में NT के तौर तरीके ऐक्यूप्रेशर (acupressure) से मिलते-जुलते प्रतीत होते हैं।
* हालांकि, अगर कोई समानता या तुल्यता है तो वह वहीं समाप्त हो जाती है।
* वास्तव में, यह एक ऐसी अद्वितीय वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है जिसका ऐक्यूप्रेशर के साथ ही नहीं, बल्कि अन्य किसी भी पुरानी या वर्तमान थेरेपी के साथ कोई संबंध या आधार नहीं है। कुछ सिद्धान्तों को छोड़कर, जो भारतीय पारंपरिक उपचार प्रणालियों के प्रभाव से आए हों, यह सबसे अलग है।
* NT के सृजक लाजपतराय मेहरा हैं।
* वह इस औषध रहित उपचार के आदि अन्वेषक हैं।
* उनके शिष्य एवं प्रशंसक उन्हें प्यार से गुरुजी कहते हैं।
🧑‍⚕️ डॉ. लाजपतराय मेहरा के बारे में:
* वह खुद स्वीकार करते हैं कि उन्होंने आधुनिक चिकित्सा पद्धति का कोई औपचारिक अध्ययन नहीं किया है।
* हालांकि, उनके साथ चर्चा करने पर निःसंदेह पता चलता है कि उन्हें शरीर विज्ञान (physiology) का ईर्ष्याजनक ज्ञान है।
* वह क्लिनिक में पेशेंटों के संपर्क में बिताए गए घंटों के अलावा सोते-जागते बाकी हर एक पल को शरीर विज्ञान के पुस्तकों के स्वाध्याय में बिताते हैं।
* उनकी पसंदीदा पुस्तक A.C. Guyton द्वारा लिखित ‘Medical Physiology’ है, जिसे उन्होंने लगातार अनेक बार पढ़ा है।
* वह विनम्र भाव से बताते हैं कि ‘अभी तक मैं इस शरीर के प्रति बहुत ही कम जान पाया हूँ’ और ‘NT अभी शिशु अवस्था में है’।
* अनुभव और योगदान: पिछले 70 साल से वह अथक और अटूट प्रयास द्वारा NT के प्रयोगों में निखार लाने और इन्हें और उत्तम बनाने की ओर अग्रसर हैं।
* पिछले तीन दशकों में वह अकेले ही इस थेरेपी से पचास लाख से ज़्यादा रोगियों को तरह-तरह की बीमारियों से छुटकारा दिला चुके हैं।
* इसमें मंद बुद्धि तथा सेरेब्रल पैल्सी (cerebral palsy) के बच्चे भी शामिल हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि दवाई द्वारा कोई इलाज संभव नहीं है।
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न्यूरोथेरेपी (NT) की मुख्य विशेषताएँ
न्यूरोथेरेपी (NT) की अतुलनीयता/अनुपमता निम्नलिखित है:
* यह आंतरिक अंगों को ठीक करके बीमारी के मूल कारण को ही समाप्त करती है।
* यह चिकित्सा पद्धति (medical science) से प्राप्त विज्ञान का उपयोग एकदम विभिन्न और अतुलनीय तरीके से करती है जिसमें दवाइयों के उपयोग को नकारा जाता है।
* दवा रहित चिकित्सा पद्धति होने के कारण यह कम खर्चीली है और इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते।
* यह पद्धति सीखने के लिये सरल है और सभी आसानी से इसका अभ्यास कर सकते हैं।
* इसे किसी भी उम्र के व्यक्तियों को तथा कितने भी बड़े समूह को सिखाया जा सकता है।
* इसे वैज्ञानिक पद्धति कहते हैं क्योंकि इसके उपचारों को बार-बार एवं अलग-अलग व्यक्तियों पर प्रयोग करने पर भी एक जैसे निष्कर्ष या परिणाम निकलते हैं।
* LMNT के रोग निदान एवं डाइग्नोसिस के अपने विशिष्ट तरीके तो हैं ही, साथ में आधुनिक जाँच-पड़ताल से प्राप्त ज्ञान जैसे रक्त की जाँच या X-ray से खींची गई तस्वीर इत्यादि के साथ भी समन्वय रखते हैं।
* पैरों से मरीज के शरीर पर दबाव डालना इस थेरेपी का मुख्य अंश है। फिर भी, थेरेपिस्ट यानि चिकित्सक के वजन का चिकित्सा के परिणाम के साथ कोई संबंध नहीं है। अगर उपचार सही है तो परिणाम भी एक जैसे ही आते हैं।
💬 गुरुजी का विचार
जब गुरुजी से पूछा जाता है कि क्या कोई और उनकी तारीफ करे या वे लिखित रिकॉर्ड्स क्यों नहीं बनाते, तो वे कहते हैं:
* “मुझे इन सब चीज़ों से लेना-देना नहीं है।”
* “इस कार्य में ही इतना मजा आता है कि क्या कहूँ? सो कोई और मेरी तारीफ करे या न करे इसके प्रति मैं ध्यान ही नहीं देता।”
* वे कहते हैं कि दूसरों को दिखाने के लिए रोज़ लिखित records बनाने के लिए जितना समय देना पड़ेगा, उतने समय में वे और पंद्रह-बीस लाख रोगियों की सेवा कर सकते हैं।
* उनके लिए “उपचार के बाद रोगी या उसके रिश्तेदारों के चेहरे पर जो खुशी भरी मुस्कुराहट अपने आप खिल उठती है, उस परम आनंद का नशा तो कुछ और ही है! उसका मुकाबला दुनिया का कोई पारितोषिक (award) नहीं कर सकता!”
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😟 बीमारियां आने के कुछ कारण
मानव शरीर में सभी बीमारियाँ तब आती हैं जब आंतरिक रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है।
इसके कारण निम्न परिणाम दिखते हैं:
* आंतरिक वातावरण के विभिन्न कारकों में गड़बड़ी, जैसे कि रक्त चाप (BP), रक्त में शुगर की मात्रा, तापमान इत्यादि में उतार-चढ़ाव।
* विभिन्न फ्लुइड (body fluids) की ऐसिड-ऐल्कली के गुण में परिवर्तन।
* विभिन्न हौरमोन्स, एन्जाइम्स, ऐन्टीबौडीज इत्यादि की मात्रा में उतार-चढ़ाव।

NT का उपचार):
* NT के उपचार द्वारा विभिन्न ग्रंथियों को उकसाया जाता है जिससे वे सामान्य रूप से काम करने लगते हैं।
* इससे आवश्यक कैमीकल्स उचित मात्रा में बनते हैं और अंदरी रसायनों का बिगड़ा हुआ संतुलन लौट आता है।
🔬 शरीर क्रिया विज्ञान
* हमारा शरीर विभिन्न कैमीकल्स यानि रसायन बनाने वाला एक बहुत बड़ा कारखाना है।
* लिवर तथा पैक्रियास कई ऐसे कैमीकल्स बनाते हैं जो आगे चलकर अन्य अंगों और ग्रंथियों के हौरमोन्स तथा एन्जाइम्स बनाने के लिये मूल पदार्थ के काम आते हैं।
* सभी ग्रंथियों तथा अंगों का सही विधान पाचन तंत्र (एवं उसके सहायक अंगों) के पूर्ण रूप से सही कार्य करने पर निर्भर है।
लिवर तथा पैक्रियास इन कैमीकल्स को सही मात्रा में तथा सही समय में तभी बना पाएंगे जब निम्नलिखित शर्तें पूरी होंगी:
* भोजन में प्रोटीन्स, कारबोहाइड्रेट्स, फैट्स, विटामिन, मिनरल्स तथा रेशेदार पदार्थ उपयुक्त मात्रा में शामिल होने चाहिए।
* खाने के विभिन्न अंश ठीक तरह से पच जाने चाहिए।
* पचा हुआ पदार्थ पूर्ण रूप से रक्त में अवशोषित होना चाहिए और सही तरीके से स्टोर होना चाहिए。
* सभी फालतू यानि अनचाही चीजें (ठोस या तरल) का निकास सही समय पर तथा पूर्ण रूप से होना चाहिए।
* फेफड़ों (लंग्ज) द्वारा ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान सही रूप से हो।
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💡 न्यूरोथेरेपी और स्वास्थ्य के मापदंड (Criteria for
Ys Neurotherapy Health And Research Foundation के अनुसार, पूर्ण स्वास्थ्य के लिए निम्नलिखित मापदंडों (criteria) का पूरा होना ज़रूरी है:
* आहार और जल: व्यक्ति को केवल पौष्टिक नहीं, बल्कि संतुलित आहार (balanced diet) खाना चाहिए जिसमें सभी आवश्यक चीज़ें पर्याप्त मात्रा में हों। साथ ही, सही मात्रा में और नियमित रूप से पानी पीना चाहिए।
* पाचन क्रिया: लार ग्रंथियाँ, पेट, लिवर और पैंक्रियास (यकृत और अग्न्याशय) समेत पाचन संस्थान के विभिन्न अंगों को भोजन को ठीक प्रकार से पचाना चाहिए।
* अवशोषण: छोटी आंत (ड्युओडेनम, जेजुनम, तथा ईलियम) को सही प्रकार से काम करना चाहिए ताकि पचे हुए भोजन से प्राप्त पोषण तत्वों का अवशोषण ठीक से हो।
* निकास (उत्सर्जन): किडनी, स्किन (त्वचा), तथा बड़ी आंत को नियमित रूप से कार्य करना चाहिए ताकि फालतू चीज़ों का पूर्ण निकास रोज़ हो सके।
* ऑक्सीजन का उपयोग: लंग्ज (फेफड़े) ठीक से कार्य करें और हमें सही तरीके से प्राणायाम करने की आदत डालनी चाहिए ताकि ऑक्सीजन का पूर्ण उपयोग हो सके।
🔑 स्वास्थ्य की कुंजी (Key to Health)
गुरुजी ऊपर दिए गए तथ्यों का सारांश इस प्रकार कहते हैं:
अगर पेट, लंग्ज (फेफड़े) तथा किडनी (गुर्दे) ठीक से कार्य करे तो बीमारी आ ही नहीं सकती।
🧠 YS-NTHRF का अनोखा दृष्टिकोण (NT’s Unique Approach)
* YS-NTHRF (न्यूरोथेरेपी) में, पेट तथा संबंधित अंगों को ठीक करने पर अत्यधिक ध्यान दिया जाता है, क्योंकि उसी में पूर्ण स्वास्थ्य की कुंजी है। ऐसा करने से शरीर अस्वस्थ स्थिति से निकलकर वापस बीमारी रहित स्थिति में लौटता है।
* उपचार की तरकीब: NT द्वारा शरीर को ठीक करने के लिए अपनाया गया तरीका बहुत ही सरल है।
* पहला कदम: यह पता लगाना है कि पाचन तंत्र के कौन-कौन से अंग ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
* पता लगाने का तरीका: इसके लिए एक सहज तरीका इस्तेमाल किया जाता है: “जब कभी शरीर के किसी भी अंग के रक्त संचार में बाधा या रुकावट हो तो उस भाग में दर्द या सुन्नपन महसूस होता है”।
* मूल सिद्धांत: यदि कुछ देर तक झुक कर या टेढ़े-मेढ़े बैठे रहें तो रक्त संचार में बाधा के कारण पीठ में दर्द महसूस होता है। स्थिति बदलने पर रक्त संचार ठीक होता है और दर्द से राहत मिलती है।
* इस सिद्धांत को उल्टा करने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि अगर किसी भी भाग का दर्द खत्म हो जाए, तो इसका मतलब उस जगह का रक्त संचार ठीक हो चुका है।
* यह तथ्य अंदरूनी अंगों के दर्दों के प्रति भी उतना ही सच है जितना कि पीठ के दर्द के बारे में है।
* पर्याप्त रक्त न मिलने के कारण वह ग्रंथी या अंग पहले से कम कार्य करेगा या अपनी क्रियाओं को पूर्ण रूप से नहीं कर पाएगा।
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📝 पाचन तंत्र और स्वास्थ्य
* रक्त प्रवाह में कमी: हमारी रोज़मर्रा की गतिविधियों में, रक्त का अधिकांश भाग हाथ-पैर, ब्रेन (दिमाग) आदि की ओर बढ़ता है, जिससे पाचन तंत्र के अंगों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
* पाचन क्रिया पर प्रभाव: रक्त प्रवाह की इस कमी के कारण पाचन क्रिया के लिए पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता।
* अंगों का सुस्त होना: रक्त की कमी पाचन संस्थान के अंगों को सुस्त बना देती है।
* कार्यक्षमता में कमी: सुस्त अंग भोजन को पचाने और अवशोषण को पूर्ण रूप से करने में असमर्थ होते हैं।
* ग्रंथियों पर दुष्प्रभाव: चूंकि सभी ग्रंथियाँ अपने कच्चे पदार्थ (raw materials) प्राप्त करने के लिए भोजन के पोषण तत्वों पर निर्भर करती हैं, इसलिए पाचन क्रिया ठीक से न होने पर ग्रंथियों की कार्यशैली पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।
* बीमारियों का जन्म: यह समस्या आगे चलकर विभिन्न लक्षणों को जन्म देती है, जो अंत में किसी न किसी बीमारी का रूप धारण कर लेती है।
💡 बीमारी का मूल कारण
* मूल कारण: बीमारी का नाम चाहे कुछ भी हो, सच यह है कि यह सिर्फ मुट्ठी भर अंगों की गड़बड़ी के कारण आई है।
* अधिकांश बीमारियों का मूल कारण: मानव जाति को पीड़ित करने वाली प्रायः हर बीमारी का मूल कारण पाचन अंगों की यही गड़बड़ी है।
* उपचार: अगर मूल कारण को सही तरीके से ठीक किया जाए, तो शरीर की बीमार पड़ने की प्रवृत्ति ही खत्म हो जाती है।
* प्रगतिशील समस्या: मूल कारण के असर से ही एक के बाद एक परिस्थितियाँ बनती हैं कि पहले एक या दो ऑर्गन ठीक से काम नहीं करते और बढ़ते-बढ़ते चरम सीमा में एक खास बीमारी के रूप तक पहुँचते हैं।
🩺 NT और उपचार
* तर्कयुक्त समाधान: यह तर्कसंगत है कि हमें संबंधित अंग को पूरा रक्त मिलने के लिए उचित कदम उठाने के अलावा और कुछ करने की जरूरत नहीं है।
* NT का कार्य: (न्यूरोथेरेपी) में यह कार्य मुख्य रूप से शारीरिक तौर पर करते हैं।
* योग से तुलना: योग भी यही करता है, फर्क सिर्फ इतना है कि उसमें मन को भी शामिल किया जाता है।
🔎 रक्त प्रवाह की कमी का पता लगाना
* आसान तरीका: कई दशकों की शोध के आधार पर डॉ. मेहरा ने यह सिद्ध किया है कि शरीर में रोग अथवा रोगों के लक्षण होने पर, नाभि अथवा कमर की हड्डी के पास अथवा दोनों स्थानों के पास के कुछ विशिष्ट बिंदुओं को दबाने पर दर्द अथवा अकड़ाव का अनुभव होता है।
* आगे की जानकारी: इन दर्द के स्थलों को ढूँढना भी अत्यंत आसान है
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🍎 पाचन तंत्र के अंग – सुन्दर स्वास्थ्य की कुंजी
Ys Neurotherapy Health And Research Foundation के अनुसार, हमारी पाचन क्रिया को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता क्योंकि दिनचर्या के कामों के कारण रक्त का अधिकांश भाग हाथ-पैर, ब्रेन आदि की ओर चला जाता है, जिससे पाचन तंत्र के अंगों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।
* रक्त की कमी के कारण पाचन संस्थान के अंग सुस्त हो जाते हैं।
* परिणामस्वरूप, वे भोजन को पचाने और अवशोषण (absorption) को पूर्ण रूप से करने में असमर्थ होते हैं।
* चूंकि सभी ग्रंथियां अपने कच्चे पदार्थ (raw materials) के लिए भोजन के पोषण तत्वों पर निर्भर करती हैं, इसलिए पाचन क्रिया के ठीक से न होने पर ग्रंथियों की कार्यशैली पर भी बुरा असर पड़ता है।
* यह आगे चलकर विभिन्न लक्षणों को जन्म देता है, जो अंत में किसी न किसी बीमारी का रूप धारण कर लेते हैं।
बीमारी का नाम कुछ भी हो, सच तो यह है कि वह सिर्फ मुट्ठी भर अंगों की गड़बड़ी के कारण आती है, और यही मानव जाति को पीड़ित करने वाली प्रायः हर बीमारी का मूल कारण है।
✅ समाधान
यह तर्कसंगत है कि हमें संबंधित अंग को पूरा रक्त मिलने के लिए उचित कदम उठाने के अलावा और कुछ करने की जरूरत नहीं है। यदि मूल कारण को ठीक किया जाए, तो शरीर की बीमार पड़ने की प्रवृत्ति ही खत्म हो जाती है।
* बीमारी आने से पहले वह अंग ठीक ही काम कर रहा था, इसलिए मूल कारण को ठीक करने के बाद भी उसे ठीक से काम करना चाहिए।
* (Neurotherapy) में यह कार्य मुख्य रूप से शारीरिक तौर पर किया जाता है।
* योग भी यही करता है, फर्क सिर्फ इतना है कि उसमें मन को भी शामिल किया जाता है।
🔍 पता कैसे लगाएँ?
यह पता लगाना कि किस अंग में ठीक से रक्त का प्रवाह नहीं है, बहुत आसान है!
कई दशकों के शोध के आधार पर डॉ. मेहरा ने यह सिद्ध किया है कि शरीर में कुछ रोग या रोगों के लक्षण होने पर:
* नाभि के पास,
* अथवा कमर की हड्डी के पास,
* अथवा दोनों स्थानों के पास के कुछ विशिष्ट बिंदुओं को दबाने पर दर्द अथवा अकड़ाव का अनुभव होता है।

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न्यूरोथेरेपी में दर्द देखने का तरीका और उससे प्राप्त विशेष जानकारी एलोपैथी के “Palpation” (परीक्षण) नामक तरीके से भिन्न है।
दर्द का पता लगाना
पेट के दर्द का पता लगाना सरल है।
* अपनी उँगलियों के नोकों से कुछ निर्धारित जगहों पर नरम प्रेशर के साथ अंदर की ओर दबाना है।
* ऐसा करने से आसानी से पता चलता है कि पेट के किस भाग में दर्द है।
* किसी भी जगह में दर्द का होना यह सूचित करता है कि उस भाग में एवं उससे सम्बन्धित अंगों में रक्त के प्रवाह में कुछ गड़बड़ी है।
जानकारी को जोड़ना
जब यह पता चल जाता है कि किस भाग में रक्त संचार की गड़बड़ी है, तो अगला पड़ाव है – उस जानकारी को अंदरूनी अंगों के कार्य शैली के साथ जोड़ना।
इस कार्य के लिए, डॉ. मेहरा ने लाखों रोगियों से प्राप्त अनुभव के आधार पर एक अनोखे उपकरण की खोज की है, जो मानव जाति के लिए एक अद्भुत वरदान है। यह है:
> ‘The NT Diagnostic Chart of Pain Points.’
>
सुविधा के लिए, नाभि के आसपास के दर्द के प्वाइंट को कुछ कोड नाम (सांकेतिक नाम) दिए गए हैं। ये नाम साधारणतः उस भाग से सम्बन्धित किसी मुख्य अंग या लक्षण को सूचित करते हैं।
NT के नाभि के आसपास के दर्द के प्वाइंट एवं उनसे सम्बन्धित अंग / लक्षण
| सांकेतिक नाम | मुख्य ऑर्गन या सम्बन्धित लक्षण | सांकेतिक नाम | मुख्य ऑर्गन या सम्बन्धित लक्षण |
|—|—|—|—|
| Pan | पैंक्रियास | WD | यूट्रस, प्रोस्टेट ग्लैंड |
| Gal | गॉल ब्लैडर | Spl | स्प्लीन |
| Liv | लिवर | Mu | म्यूकस |
| Const | कॉन्स्टिपेशन (कब्जी) | Dys | डिसेन्ट्री (पेचिश) |
| Gas | पेट & ड्युओडेनम | Gas ‘I’ | जेजुनम, ईलियम |
| Lt.Ov | बायीं ओवरी या टैस्टीस | Rt.Ov | दायीं ओवरी या टैस्टीस |
| Acid | ऐसिडोसिस के लक्षणों को ठीक करता है | Fluid | ऐल्कलोसिस के लक्षणों को ठीक करता है |
| B12 | विटामिन \text{B}_{12} की कमी के लक्षण से जुड़ा | Folic | फोलिक एसिड की कमी के लक्षण से जुड़ा है |
NT के पृष्ठ भाग के दर्द के प्वाइंट
| सांकेतिक नाम | मुख्य ऑर्गन या सम्बन्धित लक्षण |
|—|—|
| Mu म्यूकस ज़ीरो | Left Kidney (बायीं किडनी) |
| Liv लिवर ज़ीरो | Right Kidney (दाहिनी किडनी) |
| Thia, Nia, | Thiamine, Niacin की कमी के लक्षणों से जुड़ा है |

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न्यूरोथेरेपी में NT उपचार
NT (Liver-Mu) न्यूरोथेरेपी उपचार का एक आवश्यक अंग है, जो किडनी के स्टिमुलेशन से संबंधित है।
LMNT के Mu° और Liv° बिंदु
* NT का Mu° बिंदु: यह शरीर के बायीं तरफ अन्तिम पसली और कमर की हड्डी के मध्य मृदु भाग पर स्थित है। इस बिंदु को धीरे से दबाने पर आसानी से ढूँढा जा सकता है।
* NT का Liv° बिंदु: यह NT के Mu° बिंदु के एकदम दायीं तरफ स्थित है।
LMNT के उपचार में Liv और Liv° तथा Mu और Mu° को देने का स्थल और तरीका समान ही है। हालांकि, उपचार के तरीके में दो बदलाव हैं:
* तीन जगह से बदलकर एक ही बिंदु पर देना है, जिसे सूचित करने के लिए \text{°} (डिग्री) संकेत का उपयोग किया गया।
* हाथ की बिंदु का स्थल ऊपर कंधे पर है, जिसे घात रूप में () (ब्रैकेट) में प्रदर्शित किया गया है।
LMNT में किडनी के सांकेतिक नाम (Liv° और Mu°)
गुर्दों को LMNT उपचार में विशिष्ट सांकेतिक नाम (Liv° और Mu°) देने के निम्नलिखित कारण हैं:
* रोगी को घबराहट से बचाना: “किडनी” शब्द के प्रयोग मात्र से रोगी को “डायालिसिस, अस्पताल के वार्ड, ऑपरेशन” जैसी भयानक कल्पनाओं से अत्यधिक घबराहट हो सकती है। रोगियों की ऐसी निर्मूल आशंकाओं से बचाने के लिए, गुरुजी ने चतुराईपूर्वक गुर्दों को Liv-Mu के कूटनाम दे दिए हैं।
* याद्दाश्त की दृष्टि से: ‘Liv’ pain point नाभी के दायीं ओर स्थित है, इसलिए उसके ठीक पीछे स्थित किडनी को \text{Liv°} नाम दिया गया। इसी प्रकार, ‘Mu’ pain point के पीछे स्थित बायीं किडनी को \text{Mu°} नाम दे दिया गया है।
LMNT परीक्षण और उपचार की पुनरावृत्ति
LMNT में रोग के मूल कारण को समाप्त करने के लिए निम्न तरीके अपनाए जाते हैं:
* NT pain points को चेक करें और पता लगाएँ कि कौन से अंग उचित प्रकार से काम नहीं कर रहे हैं।
* अंग (अंगों) की गड़बड़ी का विश्लेषण करें और मूल कारण का पता लगाएँ।
* जिन अंगों में परेशानी है, उनमें रक्त संचार बढ़ाकर उन्हें स्टिमुलेट करें ताकि वे सामान्य रूप से कार्य करने लगें।
इस तरीके से न केवल रोग के लक्षण का निदान होता है, बल्कि शरीर की बीमार होने की प्रवृत्ति को ही जड़ से खत्म कर दिया जाता है।
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Sanjay Yadav
Sanjay Yadav
Author
Mr. Sanjay Yadav is the Founder and Director of Ys Neurotherapy Health and Research Foundation and a qualified Neurotherapist from Mumbai, India, with extensive experience in the field...