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न्यूरोथेरेपी के जनक डॉक्टर लाजपत राय मेहरा की जीवनी

न्यूरोथेरेपी के जनक डॉक्टर लाजपत राय मेहरा की जीवनी

न्यूरोथेरेपी के सूत्रधार डॉ. मेहरा की संक्षिप्त जीवनी

विभूतियों की कर्म भूमि रही है। अद्भुत गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन और स्वामी विवेकानंद के अलावा बेंजामिन फ्रैंकलिन, हेनरी फोर्ड, थॉमस अल्वा एडिसन, एवं आधुनिक काल के डॉ. भाभा, हरगोविंद खुराना, स्टीफन हॉकिंग, जोसे सिल्वा एवं ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे नाम इस श्रेणी में आते हैं।

इसी कड़ी में नाम आता है प्रातः स्मरणीय पूज्यपाद डॉ. लाजपत राय मेहरा जी का। इनका जन्म अम्बाला के एक कुलीन परिवार में 23 अगस्त 1932 को श्री रामपाल मेहरा और श्रीमती केशर देवी की सातवीं संतान के रूप में हुआ। यह बचपन से ही अत्यंत मेधावी, सत्य एवं अहिंसा के अनुयायी तथा अत्यंत विनम्र स्वभाव के थे। डॉ. मेहरा जी का बचपन से ही आयुर्वेद में गहरा रुझान था। इस रुझान ने उन्हें मानव रोगों से राहत दिलाने हेतु प्रेरित किया। अतः उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया।

बचपन में ही उन्होंने अपने बड़े भाई श्री एल.एम.एन.टी. मेहरा जी का अनुभव प्राप्त किया। उनके भाई एल.एम.एन.टी. मेहरा जी आयुर्वेदिक अनुभव पद्धति एल.एम.एन.टी. से लोगों की चिकित्सा करते थे। बालक लाजपत राय मेहरा जी भी उनके साथ बैठते थे और ध्यानपूर्वक उनकी कार्य प्रणाली सीखते रहते थे।

एक दिन उनके पिता अत्यधिक अस्वस्थ थे। औषधियों के बावजूद कोई राहत नहीं मिली, करीब 8-10 दिनों तक वे बिस्तर पर पड़े रहे। उनकी अवस्था देखकर बालक मेहरा जी बहुत दुखी हुए। उन्होंने अपने बड़े भाई से पिता को ठीक करने के लिए कहा, और एक अंजान सरल देशी तकनीक द्वारा उनके हाथ और पैरों का एक विशेष तरीके से खोज कर, लगभग तुरंत ही उसे ठीक कर दिया। दूसरों की सहायता करना बालक लाजपत राय का स्वाभाविक गुण था। अगली सुबह के अजूबे के विपरीत, उस बालक ने इस घटना को विस्मृत नहीं किया। वह लगातार उस बात पर ध्यान करने लगा कि कैसे एक बहुत ही सामान्य एवं सरल तरीके से उसके शरीर में यह चमत्कार हो गया। इतना ही नहीं, उसके मन में यह लालसा जाग उठी कि किसी प्रकार मैं भी अनुशीलन करूँ कि इसी तरह के दर्द से मुक्ति का स्रोत क्या हो सकता है।

भारतीय ग्रंथों में नाभि को पूरे शरीर का केन्द्र माना गया है। पेट के अंगों तथा उसके संबंध में नाभि की स्थिति में गड़बड़ी ही पाचन विकार का प्रमुख कारण है। हालांकि उस बूढ़े आदमी ने अपनी सीखी तकनीक उसे सिखाई नहीं थी, पर बालक लाजपत राय खुद आयु और अनुभव के उस प्रक्रिया के दौरान उसके शरीर के कुछ बिंदुओं पर दबाव डालता था। उसकी मां अक्सर पेट दर्द से पीड़ित रहती थीं, जिसके लिए वह मालिश लेती थीं।

Sanjay Yadav
Sanjay Yadav
Author
Mr. Sanjay Yadav is the Founder and Director of Ys Neurotherapy Health and Research Foundation and a qualified Neurotherapist from Mumbai, India, with extensive experience in the field...