वाई एस न्यूरोथेरेपी स्वास्थ्य और अनुसंधान फाउंडेशन
न्यूरोथेरेपी क्या है और कैसे कार्य करती है?
न्यूरोथेरेपी:एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिस में रोग विशेष को ही नहीं बल्कि शरीर के समग्र रुप का ध्यान रखा जाता है।न्यूरोथेरेपी के जनक लाजपत राय मेहरा का मानना है कि प्रत्येक जीव के शरीर में अलौकिक और रहस्यमयी नजक्षमता होती है ,जो शरीर को स्वस्थ रखती है।परमात्मा ने शरीर की रचना इस तरह से की है की शरीर को संचायमान बनाये रखने वाली सारी आवश्यकताएँ स्वतः पूरी होती रहती है न्यूरोथेरेपी एक ऐसी निरापद चिकित्सा पद्धति है जिसमें रोगी को रोगमुक्त होने के लिए किसी बाहरी रसायन अर्थात दवाइयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।इस मे रक्त के बहाव को बिमारी के अनुसार निश्चित समय के लिए रोक कर या बढ़ाकर इलाज किया जाता हैं।न्यूरोथेरेपी में सबसे पहले यह देखा जाता हैं कि बीमारी का कारण क्या है? इस थेरेपी के अनुसार बिमारी आने के मुख्य कारण है जैसे:-पेट खराब होना(पाचन तंत्र का ठीक ना होना):-अगर पाचन तंत्र ठीक ढंग से अपना कार्य नहीं कर रहा तो जो कुछ भी हम खाते है, वह सही ढंग से नहीं पचेगा और जो पोषक तत्व हमारे शरीर को मिलने चाहिए वो नही मिलेगा। जिस कारण शरीर कमजोर हो कर रोगग्रस्त हो जाता है ।जैसे-पेट की खराबी मे गैस, कब्ज, जलन आदि को आम आदमी कोई बिमारी नहीं मानता।मगर यही पेट की खराबियाँ अगर ज्यादा देर तक शरीर मे रहे तो आधा-सिरदर्द,गठिया, अनिद्रा, आलस्य, नपुंसकता, मानसिक तनाव, अल्सर, मधुमेह,(शुगर)रक्त की कमी आदि के रूप मे सामने आती है।ग्रंथियों या अंगो का ठीक प्रकार से कार्य न करना: अगर पेट ठीक होने के बाद भी अगर कोई बिमारी है तो इसका मतलब है कि शरीर का कोई अंग या ग्रंथी ठीक ढंग से अपना कार्य नही कर रही।उसे जो हारमोन्स या केमिकल्स बनाने चाहिए थे वो नहीं बना रही। कारण की उसे ठीक मात्रा में रक्त नही पहुंच रहा है इस कारण भी शरीर रोगग्रस्त हो जाता है।
अम्ल और क्षार काअसन्तुलन होना:शरीर मे दो प्रकार का संतुलन होता हैं
(Acid Alkaline) (अम्लक्षार) का सन्तुलन बिगड़ने से भी बिमारी आती है, जैसे-कब्ज(Low BP) चमड़ी का रोग, हाईपोथाईराइड, शरीर में Acid बढ़ने से और कैंसर, मिर्गी (High BP), हाईपरथाईराइड Alkaline शरीर में बढ़ने से हो जाते हैं। ऐसे ही कारणों को समझकर न्यूरोथेरेपी में सब रोगों का ईलाज किया जाता है। न्यूरोथेरेपी में किसी भी ग्रंथी के कार्य को सामान्य करने के लिए कुछ अन्य ग्रंथियों के कार्य को बढ़ाकर या अधिक कार्य
(Acid Alkaline) (अम्लक्षार) का सन्तुलन बिगड़ने से भी बिमारी आती है, जैसे-कब्ज(Low BP) चमड़ी का रोग, हाईपोथाईराइड, शरीर में Acid बढ़ने से और कैंसर, मिर्गी (High BP), हाईपरथाईराइड Alkaline शरीर में बढ़ने से हो जाते हैं। ऐसे ही कारणों को समझकर न्यूरोथेरेपी में सब रोगों का ईलाज किया जाता है। न्यूरोथेरेपी में किसी भी ग्रंथी के कार्य को सामान्य करने के लिए कुछ अन्य ग्रंथियों के कार्य को बढ़ाकर या अधिक कार्य को कम करके शरीर को रोगमुक्त किया जाता है। जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने वाले रोगो में सैप्टीसीमिया, बुखार, संक्रमण, साईन-साईटिस आदि रोगों में थाईमस, लीवर, कीड़े, सप्लीन आदि ग्रन्थियों के कार्य को बढ़ाकर इन रोगों को दूर किया जाता है। शरीर की सभी ग्रन्थियों के कार्य को सामान्य करने के लिए रक्त की सहायता से की गई प्रक्रिया ही-न्यूरोथेरेपी कहलाती है।
अनुवांशिक कारण:
अनुवांशिक रोग उन रोगों को मानते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी होते हैं। जैसे शुगर होने का एक कारण अनुवांशिक भी हो सकता है।
उपचार करने की पद्धति:
○उपचार करते समय इसमें किसी भी प्रकार के यंत्र या औजार काB इस्तेमाल नहीं किया जाता। रोगी के शरीर पर हाथों और पैरों से निश्चित स्थान पर, निश्चित समय के लिए दबाव देकर उपचार किया जाता है। इस थेरेपी का कोई साईड- ईफेक्ट नहीं है।
न्यूरोथैरेपी किन रोगों का उपचार करती है ?
गर्दन, कन्धे, पीठ, टाँग, एड़ी तथा पैर का दर्द
गर्दन का दर्द ‘सरवाइकल स्पोन्डीलोसिस’
गर्दन की जकड़न
चक्कर आना
कन्धे का दर्द, कन्धे की जकड़न,, बाजू की नस का दर्द
अंगूठे मे दर्द, जकड़न
कुहनी का दर्द
पीठ दर्द
टाँगो का दर्द
कमर का दर्द
सलिप डिस्क
पैरों की एडि़यों का दर्द
पैर का लकवा
पिण्डिली में ऐंठन
घुटनो का दर्द
सायटिका, कुल्हे तथा जाघ का दर्द
हृदय तथा रक्तसंचार के रोग
श्वास प्रणाली के रोग, दमा, खाँसी, फेफड़ो की बीमारियाँ
छाती की हड्डियों का दर्द
पाचन तंत्र के रोग
लिवर के रोग
पिताशय के रोग
पेट गैस, पेट दर्द
नाभिचक्र का ठीक नही रहना
जोड़ो, हड्डियों, मांसपेशियो के रोग
नसों में दर्द
मस्तिष्क तथा स्नायु तंत्र के रोग
लकवा, सेरेब्रल पलसी
पारकिनसन डिसीज
मिरगी
माइग्रेन आदि